Sunday, October 13, 2013

तुम हो अदभुत !

तुम हो अदभुत !
कल्पना से परे
की है तुम्हारे नाम मैंने
अपनी ये जिन्दगी,
थी तुम्हारी तलाश
उस अनजान अबूझे पथ पर
जहाँ सूनी राहें थीं
साथी मेरी ।
 
थमती धड़कन
रूकती साँसें ले
ढूँढा तुम्हें पागलों सा
कभी इस मुकाम
कभी उस डगर
हर जलती शाम
हर भीगी सहर,
तुम मिले भी तो
दिल के सारे शब्द
टूट कर बिखर गए

 
  काश !
कि तुम
अनकहे ही समझ पाते
वो तुम्हें पहरों ताकना
तुमसे बातें करना मुस्कुराना
महज़ एक
दिखावा भर नहीं था

दिल की चारदीवारी से घिरा
उम्मीद का वो घरौंदा
तुम्हारा अपना ही था,

कोई
पराया घर नहीं था
मगर अफसोस
लगता है वो बेज़ुबान बातें
  निशब्द ही रह जायेंगी
 और ख़यालों की स्याही से लिखी
वो धुँधली पड़ीं इबारतें
वक्त के सैलाब में
गुमनाम बनकर
यूँ ही कहीं बह जायेंगी ।

आरज़ू

  अगर हो आरज़ू बस एक तो हम सिर्फ ये माँगें
  मेरा सर हो तेरे आगोश में और हम रहें सोए,
  वो नाजुक उँगलियाँ चलती रहें उलझे से बालों में
  कयामत तक रहें बैठे, यूँ ही इक दूजे में खोए ।

 
  वो तेरी ज़ुल्फ लहरा कर मेरे गालों को चूमे फिर
  उलझ कर उनमें हम मदहोश हो, दीवाने हो जाएँ,
  छलकते जाम होठों के फ़कत इक बार जो पीलें
  हों बेसुध दीन दुनिया से सनम बेगाने हो जाएँ ।


  तेरे रुखसार की लाली से धुँधली हो मेरी आँखें
  तेरे चेहरे की चाँदी से मेरा तन मन चमक जाए,
  तेरी भीनी सी खुशबू मैं कहूँ क्या सितम कर डाले

  उड़े ऐसी फिज़ा में वो की हर गुलशन महक जाए ।

तेरी शोखी, तेरी मस्ती, तेरी बातों के सदके मैं
तेरी नादानियों पे क्या कहूँ, क्यूँ मुझको प्यार आए,
मेरे "कातिल" तेरे जलवे तो बस अल्लाह रे तौबा ! 
कि गर खुद आईना हो सामने तो वो भी शरमाए ।


मेरी "ज़ागीर" मेरी आरज़ू बस ये ही इतनी सी
लबों से कह भी दो "हाँ" बेवजह इनकार सा क्यों है,
मेरी "पूजा" मेरी "महफ़िल" मेरी "किस्मत" ऐ मेरी "जाँ"
मेरी "तकदीर" मेरी "आरज़ू" में सिर्फ इक तू है ।
मेरी तकदीर मेरी आरज़ू में सिर्फ इक तू है ॥

गज़ल

क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं । 
जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥
 
ना समझो कि इस पल हम पागल हुए हैं                  ये माथे की सिलवट, ये गालों की लाली,
ना पूछो कि इतना क्यूँ प्यार आ रहा है,                    ये चेहरे की रंगत भी कुछ कह रही है
अगर सुन सको तो इन आँखों से सुन लो                  जँवा प्यासे दिल में जो अरमान मचलें                     

जिन आँखों पे तेरा नशा छा रहा है,                          ना झुठलाओ दिल को, ये अरमा वही हैं
पिला दो न रखो ये परदा नज़र का                           मचलते लबों पे कुछ एहसान कर दो
नज़र से पैमाने छलक जा रहे हैं,                            लबों से तबस्सुम झड़े जा रहे हैं,

क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं ।                       क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं ।
जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥                      जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥    

                                                                    हवा-ए-तरन्नुम भी बहकी हुई है
                                                                    ये सर्दीली शब भी जवाँ हो रही है
                                                                    हैं बेकस ये बाहें, हैं प्यासी निगाहें
                                                                    ऐ हमदम ये प्यासी फ़िजाँ हो रही है
                                                                    ये कातिल समाँ ही सितम ढा रहा है
                                                                    फितूर-ए-कहर आप बरपा रहे हैं ।              

                                                                   
                                                                    क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं । 
                                                                    जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥  
                                                                   

Saturday, October 12, 2013

Calling !


आ भी जाओ ! दिल तनहा है,
जिस्म सुलगता पानी है
रूह तड़पती साँसें बोझल
धड़कन होतीं बेमानी हैं ।
आ भी जाओ ! दिल तनहा है...

पलकें झुकीं लगें बुझतीं सीं
रात अधूरी रह जाए ना
चाँद भी हँस के, प्यार को अपने
झूठा किस्सा कह जाए ना
रुक रुक के आतीं हैं साँसें 
ये कैसी नादानी है ।
आ भी जाओ ! दिल तनहा है...

ना जाने किस सोंच में उलझी
किन बातों से डरती हो
यँकीं हमें है खुद से ज्यादा
प्यार मुझी से करती हो ।
फिर क्यों आखिर छुपा रही हो 
सच को ऐसे झुठलाओ ना,
खत्म हो चुकीं जो उम्मीदें
उनको जिन्दा कर जाओ ना,
जर्रा-जर्रा मेरा तुझसे 
तुझसे मेरी कहानी है ।
आ भी जाओ ! दिल तनहा है...

- August 12, 2006

भुला दिए तुमने...

पुराने ख्वाब क्यों सारे जला दिए तुमने
किये थे हमसे जो वादे, कहाँ भुला दिए तुमने
बड़ा बेनूर सा ये खत्म होता अब सफर है
अँधेरों से हमारे रास्ते मिला दिये तुमने ।

कि ख्वाहिश तोड़ती दम, अब भी पीछे मुड़ के देखे है
कहीं उन पत्थरों से कोई इक आवाज़ आ जाए
कि जो दिल थे कभी पत्थर बने बेजान, राहों में 
है मुश्किल साँस लेना इतने आँसू ला दिए तुमने ।
किये थे हमसे जो वादे, कहाँ भुला दिए तुमने ॥

 - December 12, 2006

शाम

Scheveningen beach, The Netherlands      September 3, 2012
      जब जब शाम आती है 
 तुम्हारी यादें
 डूबते सूरज की
 ओट से निकल कर
 मेरी उँगलियाँ थाम लेतीं हैं ।
 समुन्दर के उस मुझ जैसे 
 तनहा किनारे की
 गर्म रेत पर,
 मुझे हाँथों हाँथ थामे 
 उन मीलों पसरी खामोशियों में
 धड़कनों की कदम ताल पे
 दूर तक यूँ ही चुपचाप
 चलती जाती हैं ।

 और फिर अचानक 
 सूरज डूब जाता है
 मुझे एहसास होता है
 जैसे अभी किसी ने
 मुझे छुआ था
 वो एक पल
                                                                   जो मुझे अरसा सा लगा
                                                                   उस एक पल में
                                                                          कुछ तो हुआ था ।
क्या तुम सचमुच आए थे ?
ये उदासी भरे संगीन लमहे
क्या सच में मुस्कुराए थे ?
और मैं वापस लौट पड़ता हूँ
इस उम्मीद में
कि कल फिर दिन होगा
फिर से शाम आएगी
तेरे एहसास से मेरी ऊँगलियाँ
फिर साँस लेंगी ,
और मेरी उदासी भरी तनहा शाम 
फिर से मुस्कुराएगी ॥

कितना प्यार तुम्हें करते हैं...

ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं,
तेरे तबस्सुम चुरा चुरा कर, हम सपनों में क्यूँ भरते हैं ।
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

इतनी अच्छी क्यूँ लगती हो, क्यूँ छाई हो तुम हर पल में,

रात और दिन क्यूँ आँखों में हो क्यूँ दिखती हर आज और कल में,
बातें अच्छी क्यूँ लगती हैं, हँसी हसीं सी क्यूँ लगती है,
एक तमन्ना हो तो बोलूँ, लाख तमन्ना क्यूँ जगती हैं,
यही आरजू तेरा साथ हो, हम हर पल करते रहे हैं ।
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

आँखें नीलम चाँद सा चेहरा, होंठ तबस्सुम के प्याले हैं,

बिना पिये मदहोश हुए हम, उफ !! ये क्या करने वाले हैं,
शोख अदाएँ ज़ुल्फ घटा सी, सपनों की ताबीर तुम्हीं हो,
जिसे बनाया है फुरसत से, कुदरत ने, तसवीर तुम्ही हो,
तुम शायद वो ताजमहल हो, हम जिसकी पूजा करते हैं,
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

एक नहीं सौ बार करेंगे, जो तुम कह दो उन बातों को,

एक नहीं सौ बार जगेंगे, याद आओगी जिन रातों को,
एक नहीं हर साँस तुम्हारी, हर धड़कन तेरी है हमदम,
एक नहीं सौ बार मरेंगे, प्यार नहीं होगा फिर भी कम,
मुझको खुद ही पता नहीं है, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ?
तुम ही बोलो कैसे कह दें, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥
तुम ही बोलो कैसे कह दें, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥


- Year 2000

My best gift ever


On my birthday 2013, I have got the best gift ever. It's my published biography covering glimpse of my fun filled, fulfilled life till date and statements for times to come..... 
 


Many thanks again Upasana and Niraj for this fantastic gift. You guys rock. I am blessed to have creative people like you in my life. 
God Bless you both. 
Love you loads.
Cheers !! :) 



Friday, October 11, 2013

आस...


रेत के ख़्वाब पुर-ए-जोर बनाते रहिए
आस की तर्ज़ पे नग़मा-ए-ज़िन्दगी गाते रहिए,
किसे मालुम कोई कतरा ख़ुदा के घर को जा पहुँचे
बादलों में बाँध के डोर उड़ाते रहिए
हवा की बात क्या सन्जीदगी वहाँ भी है
चुरा के अश्क हवा भी किसी के लाई है,
दरख़्तों से फिसलते, टूटते, बेज़ार कुछ लमहे
पसीजी नब्ज़ हैं शाखों में इक तनहाई है ।
अश्क हो नूर हों महफिलें यूँही सजाते रहिए,
आस की तर्ज़ पे नग़मा-ए-ज़िन्दगी गाते रहिए,
किसे मालुम कोई कतरा ख़ुदा के घर को जा पहुँचे
बादलों में बाँध के डोर उड़ाते रहिए


वो हँसते ज़ख्म तुझको याद कोई ला देंगे
सम्भाला था जिन्हें इक उम्र, तुझे दगा देंगे,
बसा लो कोशिशों की बस्तियाँ, लगा दो लाख पहरे भी,
उस इक काफ़िर की तुझको याद में रुला देंगे ।
ज़हन की आग में फ़लक की बात बनाते रहिए,

आस की तर्ज़ पे नग़मा-ए-ज़िन्दगी गाते रहिए,
किसे मालुम कोई कतरा ख़ुदा के घर को जा पहुँचे
बादलों में बाँध के डोर उड़ाते रहिए

Until we meet again..Bangalore

Today NOW !
This is one of those times of mixed feelings when you embark on a new journey to a new place, half full with excitement for things in store for you and half empty with fond memories of people and place you are leaving behind.
 Nandi Hills, Bangalore  March 16, 2013 
I thank you all my friends for offering me loads of love and care during my 6 years wonderful stay in Bangalore. My apologies, if I couldn't manage to meet you personally..Will definitely see you guys somewhere sometime soon....It's a small world anyways.
Flying to Muscat at 3:50 PM flight today from Bangalore International Airport.
Love you guys....Love Bangalore...I will certainly miss you a lot.
Until we meet again, Do keep in touch and Take care. 
Cheers !!  - feeling nostalgic @ Bengaluru International Airport, Bengaluru


It feels good to be back

It's been long five years since I have posted anything to this Blog. It seems, I was no exception and was too engaged with the routine rush of planning, building and then trying to chase the basic dreams of a typical 'now a days mankind'. Although, I thought that's not my trait to go behind set routines but may be, I was wrong or may be, it was just a break before the bang. I always wanted to do things differently and I always did. 
Now, when I have moved to a new country, new job, new people, new ways of life, I hope it's going to be a great new start for me and hope this will be more living than it was before. May God bless and guide me to execute my new plans. I am sure I will be able to make up time to keep this blog alive and kicking. Cheers ! :)