क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं ।
जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥
ना समझो कि इस पल हम पागल हुए हैं ये माथे की सिलवट, ये गालों की लाली,
ना पूछो कि इतना क्यूँ प्यार आ रहा है, ये चेहरे की रंगत भी कुछ कह रही है
अगर सुन सको तो इन आँखों से सुन लो जँवा प्यासे दिल में जो अरमान मचलें
जिन आँखों पे तेरा नशा छा रहा है, ना झुठलाओ दिल को, ये अरमा वही हैं
पिला दो न रखो ये परदा नज़र का मचलते लबों पे कुछ एहसान कर दो
नज़र से पैमाने छलक जा रहे हैं, लबों से तबस्सुम झड़े जा रहे हैं,
क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं । क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं ।
जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥ जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥
हवा-ए-तरन्नुम भी बहकी हुई है
ये सर्दीली शब भी जवाँ हो रही है
हैं बेकस ये बाहें, हैं प्यासी निगाहें
ऐ हमदम ये प्यासी फ़िजाँ हो रही है
ये कातिल समाँ ही सितम ढा रहा है
फितूर-ए-कहर आप बरपा रहे हैं ।
क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं ।
जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥
ये सर्दीली शब भी जवाँ हो रही है
हैं बेकस ये बाहें, हैं प्यासी निगाहें
ऐ हमदम ये प्यासी फ़िजाँ हो रही है
ये कातिल समाँ ही सितम ढा रहा है
फितूर-ए-कहर आप बरपा रहे हैं ।
क्यूँ आप ऐसे ज़ालिम हुए जा रहे हैं ।
जो प्यार आ रहा है, तो कतरा रहे हैं ॥

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