Saturday, October 12, 2013

Calling !


आ भी जाओ ! दिल तनहा है,
जिस्म सुलगता पानी है
रूह तड़पती साँसें बोझल
धड़कन होतीं बेमानी हैं ।
आ भी जाओ ! दिल तनहा है...

पलकें झुकीं लगें बुझतीं सीं
रात अधूरी रह जाए ना
चाँद भी हँस के, प्यार को अपने
झूठा किस्सा कह जाए ना
रुक रुक के आतीं हैं साँसें 
ये कैसी नादानी है ।
आ भी जाओ ! दिल तनहा है...

ना जाने किस सोंच में उलझी
किन बातों से डरती हो
यँकीं हमें है खुद से ज्यादा
प्यार मुझी से करती हो ।
फिर क्यों आखिर छुपा रही हो 
सच को ऐसे झुठलाओ ना,
खत्म हो चुकीं जो उम्मीदें
उनको जिन्दा कर जाओ ना,
जर्रा-जर्रा मेरा तुझसे 
तुझसे मेरी कहानी है ।
आ भी जाओ ! दिल तनहा है...

- August 12, 2006

भुला दिए तुमने...

पुराने ख्वाब क्यों सारे जला दिए तुमने
किये थे हमसे जो वादे, कहाँ भुला दिए तुमने
बड़ा बेनूर सा ये खत्म होता अब सफर है
अँधेरों से हमारे रास्ते मिला दिये तुमने ।

कि ख्वाहिश तोड़ती दम, अब भी पीछे मुड़ के देखे है
कहीं उन पत्थरों से कोई इक आवाज़ आ जाए
कि जो दिल थे कभी पत्थर बने बेजान, राहों में 
है मुश्किल साँस लेना इतने आँसू ला दिए तुमने ।
किये थे हमसे जो वादे, कहाँ भुला दिए तुमने ॥

 - December 12, 2006

शाम

Scheveningen beach, The Netherlands      September 3, 2012
      जब जब शाम आती है 
 तुम्हारी यादें
 डूबते सूरज की
 ओट से निकल कर
 मेरी उँगलियाँ थाम लेतीं हैं ।
 समुन्दर के उस मुझ जैसे 
 तनहा किनारे की
 गर्म रेत पर,
 मुझे हाँथों हाँथ थामे 
 उन मीलों पसरी खामोशियों में
 धड़कनों की कदम ताल पे
 दूर तक यूँ ही चुपचाप
 चलती जाती हैं ।

 और फिर अचानक 
 सूरज डूब जाता है
 मुझे एहसास होता है
 जैसे अभी किसी ने
 मुझे छुआ था
 वो एक पल
                                                                   जो मुझे अरसा सा लगा
                                                                   उस एक पल में
                                                                          कुछ तो हुआ था ।
क्या तुम सचमुच आए थे ?
ये उदासी भरे संगीन लमहे
क्या सच में मुस्कुराए थे ?
और मैं वापस लौट पड़ता हूँ
इस उम्मीद में
कि कल फिर दिन होगा
फिर से शाम आएगी
तेरे एहसास से मेरी ऊँगलियाँ
फिर साँस लेंगी ,
और मेरी उदासी भरी तनहा शाम 
फिर से मुस्कुराएगी ॥

कितना प्यार तुम्हें करते हैं...

ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं,
तेरे तबस्सुम चुरा चुरा कर, हम सपनों में क्यूँ भरते हैं ।
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

इतनी अच्छी क्यूँ लगती हो, क्यूँ छाई हो तुम हर पल में,

रात और दिन क्यूँ आँखों में हो क्यूँ दिखती हर आज और कल में,
बातें अच्छी क्यूँ लगती हैं, हँसी हसीं सी क्यूँ लगती है,
एक तमन्ना हो तो बोलूँ, लाख तमन्ना क्यूँ जगती हैं,
यही आरजू तेरा साथ हो, हम हर पल करते रहे हैं ।
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

आँखें नीलम चाँद सा चेहरा, होंठ तबस्सुम के प्याले हैं,

बिना पिये मदहोश हुए हम, उफ !! ये क्या करने वाले हैं,
शोख अदाएँ ज़ुल्फ घटा सी, सपनों की ताबीर तुम्हीं हो,
जिसे बनाया है फुरसत से, कुदरत ने, तसवीर तुम्ही हो,
तुम शायद वो ताजमहल हो, हम जिसकी पूजा करते हैं,
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

एक नहीं सौ बार करेंगे, जो तुम कह दो उन बातों को,

एक नहीं सौ बार जगेंगे, याद आओगी जिन रातों को,
एक नहीं हर साँस तुम्हारी, हर धड़कन तेरी है हमदम,
एक नहीं सौ बार मरेंगे, प्यार नहीं होगा फिर भी कम,
मुझको खुद ही पता नहीं है, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ?
तुम ही बोलो कैसे कह दें, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥
तुम ही बोलो कैसे कह दें, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥


- Year 2000

My best gift ever


On my birthday 2013, I have got the best gift ever. It's my published biography covering glimpse of my fun filled, fulfilled life till date and statements for times to come..... 
 


Many thanks again Upasana and Niraj for this fantastic gift. You guys rock. I am blessed to have creative people like you in my life. 
God Bless you both. 
Love you loads.
Cheers !! :)