Saturday, October 12, 2013

कितना प्यार तुम्हें करते हैं...

ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं,
तेरे तबस्सुम चुरा चुरा कर, हम सपनों में क्यूँ भरते हैं ।
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

इतनी अच्छी क्यूँ लगती हो, क्यूँ छाई हो तुम हर पल में,

रात और दिन क्यूँ आँखों में हो क्यूँ दिखती हर आज और कल में,
बातें अच्छी क्यूँ लगती हैं, हँसी हसीं सी क्यूँ लगती है,
एक तमन्ना हो तो बोलूँ, लाख तमन्ना क्यूँ जगती हैं,
यही आरजू तेरा साथ हो, हम हर पल करते रहे हैं ।
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

आँखें नीलम चाँद सा चेहरा, होंठ तबस्सुम के प्याले हैं,

बिना पिये मदहोश हुए हम, उफ !! ये क्या करने वाले हैं,
शोख अदाएँ ज़ुल्फ घटा सी, सपनों की ताबीर तुम्हीं हो,
जिसे बनाया है फुरसत से, कुदरत ने, तसवीर तुम्ही हो,
तुम शायद वो ताजमहल हो, हम जिसकी पूजा करते हैं,
ये क्यूँ हम बतलाएँ तुमको, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥

एक नहीं सौ बार करेंगे, जो तुम कह दो उन बातों को,

एक नहीं सौ बार जगेंगे, याद आओगी जिन रातों को,
एक नहीं हर साँस तुम्हारी, हर धड़कन तेरी है हमदम,
एक नहीं सौ बार मरेंगे, प्यार नहीं होगा फिर भी कम,
मुझको खुद ही पता नहीं है, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ?
तुम ही बोलो कैसे कह दें, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥
तुम ही बोलो कैसे कह दें, कितना प्यार तुम्हें करते हैं ॥


- Year 2000

2 comments:

Anonymous said...

Loved it !!!!

Swati said...

Aha! How can I forget this :)